मैं कहता हूँ अँधेरा कोई नही रहा है
हर सिमट उजाला है
तुम ने मेरे घर मैं
एक नया सूरज पला है
अश्कबार हूँ तो बस इस लिए की
खुशी भर गयी थी आँखों मैं
इस खुशी की पहरेदारी अब तुम करो
सरे आंसू अपने होंठों पे धरो
मुझे प्यार करो प्यार करो बहुत प्यार करो
तेरी हर एक अदा मोहब्बत सी लगती है
एक पल की जुदाई मुद्दत सी लगती है
पहले नही अब सोचने लगे है हम ज़िंदगी के हर लम्हे मे
तेरी ज़रूरत सी लगती है
में तो तेरी यादो को भुला ख़ुद ब ख़ुद सभ्ल ही गया
तुमने नजरे मिलते ही, नजरो को क्यो झुका लिया हैं
आशिया बनाने में सदियों लगे थे, उजड़ने में लमहा
तुम ने फिर से क्षणो में आिशया केसे सज़ा लिया हैं,
मेरी ख्वाबो की मलिका तुम और सिर्फ़ तुम हो,
ये जाने नींद को भी दुश्मन हमने बना लिया हैं |