लव शायरी

कैसे  कहूं  मैं  तुम  से,  अपने  इस  दिल  की  बात,
हिम्म्म्मत  तो  की  इतनी,  लबों  ने  पर  न  दिया  साथ.
अपनी  यह  चाहत  ले  कर, करूं  मैं  अब  तुझसे  क्या  इजहार,
दिन  तो  कट  जाते  हैं  कट  ती  नही  यह  रात.
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किया  पता  तुम्हे  इस  दिल  की  हालत,
जिस  की  सागर  सी  गहराई  तक  सिर्फ़  तुम  हो.
किया  जानो  मेरी  दीवानगी  और  जूनून,
के  तुम  इतनी  दूर  होते  हुए  भी,
दिल  के  बोहोत  करीब  हो.
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कुछ  गुस्सा, कुछ  नखरा, कुछ  इल्तिजा  भी  है  आप  की,
हम  से  रूठना, हमें  सताना,
तरपाने  की  अदा  भी  है  आप  की.
हर  बात  पे  हँसना, हर  पल  मुस्कुराना,
हर  बातों  से  दिल  धर्काना.

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अपनी  शर्मीली  नज़रों  से, सुर्ख  होंठों  से,
हर  साँसों  को  चू  लेना.
क्या  क्या  करे  यह  दिल  अफ़साने  बयान  आप  के,
आप  मसीहा-ऐ-इश्क  हैं,
यह  बन्दा  खादिम  है  सिर्फ़  आप  का.

प्यार बीना जीना

प्यार  कमजोर  दिल  से  किया  नही  जा  सकता ,

ज़हर  दुश्मन  से  लिया  नही  जा  सकता,

दिल  में  बसी  है  उल्फत  जिस  प्यार  की

उस  के  बीना  जिया  नही  जा  सकता.

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साथ  रहते  रहते  यूहीं  वक्त  गुज़र  जाएगा

दूर  होने  के  बाद  कौन  किसे  याद  आएगा

जी  लो  ये  पल  जब  हुम्साथ  है

कल  का  क्या  पता, वक्त  कहाँ  ले  जाएगा