कभी आंसू कभी खुशबू
February 10, 2008 — ramlove
कभी आंसू कभी खुशबू कभी नाघ्मा बनकर |
हम से हेर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर*********** |
चाँद निकला है तेरी आँख क आँसू की तरह |
फूल महके हैं तेरी जुल्फ का साया बनकर*********** |
मेरी जागी हुई रातों को उसी की है तलाश |
सो रहा है मेरी आँखों मैं जो सपना बनकर*********** |
दिल के काग़ज़ पर उतरता है जो शेरों की तरह |
मेरे होंटों पे मचलता है जो नाघ्मा बनकर
*********** |
रात भी आए टू बुझती नहीं चेहरे की चमक |
रौह मैं फैल गया है वह उजाला बनकर*********** |
मेरा क्या हाल है यह आके कभी देख तो ले |
जी रही हूँ तेरी भूला हुआ वादा बनकर
*********** |
Dhoup मैं खो गया वह हाथ छुरा कर |
घर से जो साथ चला था मेरा साया बनकर*********** |
कभी आंसू कभी खुशबू कभी नाघ्मा बनकर |
हम से हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर |