कभी आंसू कभी खुशबू

कभी आंसू कभी खुशबू कभी नाघ्मा बनकर

हम से हेर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर 

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चाँद निकला है तेरी आँख क आँसू की तरह

फूल महके हैं तेरी जुल्फ का साया बनकर

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मेरी जागी हुई रातों को उसी की है तलाश  

सो रहा है मेरी आँखों मैं जो सपना बनकर

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दिल के काग़ज़ पर उतरता है जो शेरों की तरह

मेरे होंटों पे मचलता है जो नाघ्मा बनकर 

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रात भी आए टू  बुझती नहीं चेहरे की चमक

रौह मैं फैल गया है वह उजाला बनकर

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मेरा क्या हाल है यह आके कभी देख तो ले

जी रही हूँ तेरी भूला हुआ वादा बनकर 

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Dhoup मैं खो गया वह हाथ छुरा कर

घर से जो साथ चला था मेरा साया बनकर

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कभी आंसू कभी खुशबू कभी नाघ्मा बनकर

हम से हर शाम मिली है तेरा चेहरा बनकर

इशक तो ढ़ोग हैं

तुझे इश्क हो ये खुदा करे,
तुझे कोई उससे जुदा करे

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तेरे होट हँसना भूल जाए,
तेरी आखे पुरी नम रहा करे

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तू जिसे भी देख कर रुका करे,
वो नजर झुकाके चला करे

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तू इस की बात सुना करे,
वो किसी और की बाते कहा करे

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तुझे दोस्ती भी न आये  रास
तू तनहा तनहा रहा करे,

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तेरे खवाब बिखरे टूट कर,
तू किरिच किरिच चुना करे

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तुझे इश्क पर हो यकीन तब
उसे किताबो में पढ़ा करे

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फिर में कहूँ इश्क तो ढोंग हैं,
तू नही नही किया करे|