लव SMS
February 4, 2008 — ramlove उल्फत न सही नफरत ही सही
हम ये भी गवारा कर लेंगे
इक याद किसी की दिल मे लीये
जीने का सहारा कर लेंगे
लबों की हसी तेरे नाम कर देंगे
हर खुशी तुझ पर कुर्बान कर देंगे
जीस दिन होगी कमी मेरी दोस्ती मे
ज़िंदगी को मौत के नाम कर देंगे
“ किसी और की बाँहों में रहकर
वह हमसे वफ़ा की बात करते है
यह कैसी चाहत है यारो
वह बेवफा है यह जानकर भी
हम उस्सी से बेपनाह प्यार करते है ”
“ न समझो के हमने आपको भुला रखा है
आप नही जानते के दिल में छुपा रखा है
देखते रहे तुम्हें उमर भर इन आंखों में
इसलिए नज़रों के सामने आइना लगा रखा है ”
February 4, 2008 at 1:51 pm
आपने बिल्कुल सही जानकारी दी। चिठ्ठेकार आत्ममुग्धता के शिकार होते हैं और कई लोग तो जबरिया अपनी रिपोर्ट पढ़वाकर अपनी पीठ भी ठुकवाते हैं। लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि यह माध्यम ऐसा है जिसका सदुपयोग किया जाए तो लोग एक दूसरे के निकट आने के साथ सभ्यता, संस्कृति, समाज, खानपान, रहन सहन, दिक्कतों, सुविधाओं से परिचित हो सकते हैं। इस माध्यम से एक दूसरे को बेहतर जानकारियां दी जा सकती है और कई मुद्दे इस तरह उठ सकते हैं कि उन पर सरकारों और संगठनों को विचार करना पड़ सकता है। हम अपने ब्लॉग पर लिखी बातों को सांसदों और विधायकों एवं नौकरशाहों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं जिनसे हो सकता है समाज या समस्याग्रस्त लोगों का भला भी हो जाए। आत्ममुग्ध या खुद की प्रशंसा से बेहतर है हम एक नए और सुशिक्षित समाज के निर्माण के लिए ब्लॉगों का इस्तेमाल करें।