उल्फत न सही नफरत ही सही
हम ये भी गवारा कर लेंगे
इक याद किसी की दिल मे लीये
जीने का सहारा कर लेंगे
लबों की हसी तेरे नाम कर देंगे
हर खुशी तुझ पर कुर्बान कर देंगे
जीस दिन होगी कमी मेरी दोस्ती मे
ज़िंदगी को मौत के नाम कर देंगे
“ किसी और की बाँहों में रहकर
वह हमसे वफ़ा की बात करते है
यह कैसी चाहत है यारो
वह बेवफा है यह जानकर भी
हम उस्सी से बेपनाह प्यार करते है ”
“ न समझो के हमने आपको भुला रखा है
आप नही जानते के दिल में छुपा रखा है
देखते रहे तुम्हें उमर भर इन आंखों में
इसलिए नज़रों के सामने आइना लगा रखा है ”