




उनके हर नाज की हमने तारीफ की
शुक्रिया भी न कहने की तकलीफ की
हमने देखा तो परदे में वो झुप गए
क्या पता था वो मगरूर हो जायंगे
आजकल हमँसे रूठे …
हमको अपनी निगाहों पे हैं इत्बर
एक दिन उनको कर देंगे हम बेकरार
जिस तरह हम मोह्ह्बत में मजबूर हैं
इस तरह वो भी मजबूर हो जायंगे
आजकल हमँसे रूठे…
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