शायरों की शायरी

  • तबियत अपनी घबराती है जब सुनसान रातों में, हम ऐसे में तेरी यादों की चादर तान लेते हैं

 

  • अजब आरजू अनोखी तलब है, तुझी से तुझ को माँगना चाहता हूँ

 

  • मैंने माशूक बहारों में तुझे देखा है, चांदनी रात के सितारों में तुझे देखा है

 

  • दूरी के घाम कुछ और सिवा हो के रह गए, हम उनसे क्या मिले की जुदा होके रह गए

 

  • हम पाला मुद्दतों पहलू में, हम कुछ भी नहीं, तुमने देखा इक नज़र और दिल तुम्हारा हो गया

 

  • भूली  बिसरी  चाँद उम्मीदे, चाँद फसाने याद आए, तुम याद आए और तुम्हारे साथ ज़माने याद आए

 

  • दिल धड़कने का सबब याद आया, वह तेरी याद थी अब याद आया

 

  • मौसम आयेंगे जायेंगे, हम तुमको भूल पायेंगे

 

  • जी भर के देखा कुछ बात की, बहुत आरजू थी मुलाकात की

 

  • हजूर आप का ही एहतराम करता चलूँ, इधर से गुजरा था, सोचा सलाम करता चलूँ

 

  • एक कमी थी ताज महल में, हम ने तेरी तस्वीर लगा दी

 

  • कासिद के आते आते ख़त इक और लिख चलूँ, मैं जानता हूँ जो व्हो लिखेंगे जवाब में

 

  • दिल का वीराना  हो गया लेकिन, अब भी है तेरी आरजू इस में

 

  • और तो कौन है  जो मुझ को तस्सल्ली देता, हाथ रख देती है दिल पेय तेरी बातें अक्सर

One Response to “शायरों की शायरी”

  1. mehhekk Says:

    वाह महक तो रातों रात स्टार बन गयीं, क्या टेलेंट है! चिट्ठा चोरी होना आपकी प्रतिभा दिखाता है, वह किसी भी पेज पर हो, वह आपका अपना होता है, जब तक कोई उसके नीचे अपना नाम न लिख दे, यदि कोई ऐसा कर रहा है तो उस वेबलॉग पर एक आकउन्ट बनायें और जी भर कर उसे ग़ाली दें और उसकी आलोचना करें| सभी मित्रों को लिंक ई-मेल कर दें| बस या तो वह बेव पेज बंद कर देगा या फिर आपका नाम कविता के नीचे लिख देगा| कोई आपकी कविता चुरा सकता है आपकी प्रतिभा नहीं इसलिए चिट्ठा प्रकाशन न बंद करें| क्योंकि आपकी स्टैटस चोर/चोरनी की स्टैटस ज़्यादा होगी और वह कोई भी सर्च इंजन आपको ही पहले खोजेगा इसलिए चिट्ठा चोरों से निश्चिंत रहें|


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